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Bhent (भेंट)


देख, ये मुट्ठी भर के
तेरे लिए कुछ लाया हूँ,
चोरी नहीं की, बस
बिन बताये छुपा के ले आया हूँ। 
इतने समय से तुझे
यहीं खड़े देखता आया हूँ,
आँखों में तेज और हाथों में बाँसुरी
सब बड़ा मनमोहक लगता है। 
बस यही सोचता हूँ कि,

जो दुनिया को संभालता है,
उसे कौन ही संभालता होगा? 
भले ही तू सर्वोपरि है,
पर अनगिनत इच्छाएँ सुन कर
तू भी तो थकता होगा। 
वैसे कोई शिकायत लेकर नहीं आया आज,
और तेरे बाकी बड़े भक्तों की तरह
सोना-चाँदी, ऊँचे पकवान
वो तो मेरे हक में नहीं है। 
पर तू चाहे तो आ,
मेरे बगल में बैठ,
और ये माखन बाँट ले। 

 

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